rudraksh information
रुद्राक्ष यानि रुद्र+अक्ष,
रुद्र अर्थात भगवान शंकर व अक्ष अर्थात
आंसू। भगवान शिव के नेत्रों से जल की कुछ बूंदें भूमि पर गिरने से महान
रुद्राक्ष अवतरित हुआ। भगवान शिव की आज्ञा पाकर वृक्षों पर रुद्राक्ष फलों के
रूप में प्रकट हो गए। मान्यता है रुद्राक्ष अड़तीस प्रकार के हैं जिनमें
कत्थई वाले बारह प्रकार के रुद्राक्षों की उत्पत्ति सूर्य के नेत्रों से,
श्वेतवर्ण के सोलह
प्रकार के
रुद्राक्षों की उत्पत्ति चन्द्रमा के नेत्रों से तथा कृष्ण वर्ण वाले दस प्रकार के
रुद्राक्षों की उत्पत्ति अग्नि के नेत्रों से होती है। आइए जानें रुद्राक्षों के दिव्य तेज से
आप कैसे दुखों से मुक्ति पा कर सुखमय जीवन जीते हुए शिव कृपा पा सकते
हैं
यथा
च दृश्यते लोके रुद्राक्ष: फलद: शुभ:।
न तथा दृश्यते अन्या च मालिका परमेश्वरि:।।
न तथा दृश्यते अन्या च मालिका परमेश्वरि:।।
अर्थात
संसार में रुद्राक्ष की माला की तरह अन्य कोई दूसरी माला फलदायक और शुभ नहीं है।
श्रीमद्-
देवीभागवत में लिखा है :
रुद्राक्षधारणाद्य श्रेष्ठं न किञ्चिदपि विद्यते।
रुद्राक्षधारणाद्य श्रेष्ठं न किञ्चिदपि विद्यते।
अर्थात
संसार में रुद्राक्ष धारण से बढ़कर श्रेष्ठ कोई दूसरी वस्तु नहीं है।
रुद्राक्ष,
तुलसी आदि दिव्य औषधियों की माला धारण करने के
पीछे वैज्ञानिक मान्यता
यह है कि होंठ व जीभ का प्रयोग कर उपांशु जप करने से साधक की कंठ-धमनियों को सामान्य से अधिक कार्य
करना पड़ता
है जिसके परिणामस्वरूप कंठमाला,
गलगंड आदि रोगों के होने की आशंका होती है। उसके बचाव
के लिए गले
में उपरोक्त माला पहनी जाती है।
रुद्राक्ष
अपने विभिन्न गुणों के कारण व्यक्ति को दिया गया ‘प्रकृति का अमूल्य उपहार है’ मान्यता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के नेत्रों से निकले जलबिंदुओं से हुई है.
अनेक धर्म ग्रंथों
में रुद्राक्ष के
महत्व को प्रकट किया गया है जिसके फलस्वरूप रुद्राक्ष का महत्व जग प्रकाशित है. रुद्राक्ष को धारण करने से
समस्त पाप नष्ट
हो जाते हैं इसे धारण
करके की गई पूजा हरिद्वार, काशी,
गंगा जैसे तीर्थस्थलों के समान फल प्रदान करती है. रुद्राक्ष की माल द्वारा मंत्र उच्चारण करने से फल
प्राप्ति की संभावना कई
गुना बढ़ जाती है.इसे धारण करने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. रुद्राक्ष की माला अष्टोत्तर शत अर्थात 108
रुद्राक्षों की या 52 रुद्राक्षों की होनी चाहिए अथवा सत्ताईस दाने की
तो अवश्य हो इस संख्या
में इन रुद्राक्ष मनकों को पहना विशेष फलदायी माना गया है. शिव भगवान का पूजन एवं मंत्र जाप रुद्राक्ष की
माला से करना बहुत प्रभावी माना
गया है
तथा साथ ही साथ अलग-अलग रुद्राक्ष के दानों की माला से जाप या पूजन करने से विभिन्न इच्छाओं की पूर्ति होती
है.धारक को शिवलोक की प्राप्ति
होती है,
पुण्य मिलता है, ऐसी पद्मपुराण, शिव महापुराण आदि शास्त्रों में मान्यता है।
रुद्राक्ष की दो जातियां होती हैं- रुद्राक्ष एवं भद्राक्ष
रुद्राक्ष
के मध्य में भद्राक्ष धारण करना महान फलदायक होता है।
भिन्न-भिन्न
संख्या में पहनी जाने वाली रुद्राक्ष की माला निम्न प्रकार से फल प्रदान करने में
सहायक होती है जो इस प्रकार है
1 रुद्राक्ष
के सौ मनकों की माला धारण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2 रुद्राक्ष
के एक सौ आठ मनकों को धारण करने से समस्त कार्यों में सफलता
प्राप्त होती है। इस माला को धारण करने वाला अपनी पीढ़ियों का उद्घार करता है।
3 रुद्राक्ष
के एक सौ चालीस मनकों की माला धारण करने से साहस, पराक्रम और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
होती है।
4 रुद्राक्ष
के बत्तीस दानों की माला धारण करने से धन, संपत्ति एवं आयु में वृद्धि होती है।
5 रुद्राक्ष
के 26 मनकों की माला को सर
पर धारण करना चाहिए।
6 रुद्राक्ष
के 50 दानों की माला कंठ
में धारण करना शुभ होता है।
7 रुद्राक्ष
के पंद्रह मनकों की माला मंत्र जप तंत्र सिद्धि जैसे कार्यों के लिए उपयोगी होती
है।
8 रुद्राक्ष
के सोलह मनकों की माला को हाथों में धारण करना चाहिए।
9 रुद्राक्ष
के बारह दानों को मणि बंध में धारण करना शुभदायक होता है।
10 रुद्राक्ष
के 108, 50 और 27 दानों की माला धारण करने या जाप करने से
पुण्य की प्राप्ति होती है।
Rudraksha Dharan Karne
ki Vidhi
रुद्राक्ष
को धारण करने की सरल विधि यदि किसी कारणवश रुद्राक्ष के विशेष
रुद्राक्ष मंत्रों से धारण न कर सके तो इस सरल विधि का प्रयोग करके धारण कर लें।
रुद्राक्ष के मनकों को शुद्ध लाल धागे में माला तैयार करने के
बादपंचामृत (गंगाजल मिश्रित रूप से) और पंचगव्य को मिलाकर स्नान करवानाचाहिए
और प्रतिष्ठा के समय ॐ नमः शिवाय इस पंचाक्षर मंत्र को पढ़ना चाहिए। उसके
पश्चात पुनः गंगाजल में शुद्ध करके निम्नलिखित मंत्र पढ़ते हुए चंदन,
बिल्वपत्र,
लालपुष्प,
धूप, दीप द्वारा पूजन करके अभिमंत्रित करे ॐ तत्पुरुषाय
विदमहे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात || इससे अभिमंत्रित करके धारण करना चाहिए।
शिवपूजन, मंत्र,
जप, उपासना आरंभ करने से पूर्व ऊपर लिखी
विधि के अनुसार रुद्राक्ष माला को धारण करने एवंएक अन्य रुद्राक्ष की माला का
पूजन करके जप करना चाहिए। इसके अतिरिक्त नीचे लिखी सावधानियों को भी
ध्यान करना चाहिए।
1-जो रुद्राक्ष कीड़ो
ने दूषित किया हो, जो
टूटा-फूटा हो, जिसमें
उभरे हुए
दानेन हो, जो वरणयुक्त हो तथा
पूरा-पूरा गोल न हो, इन
पांच प्रकार के रुद्राक्षों को धारण नहीं करना चाहिए।2-जो रुद्राक्ष छिद्र करते हुए फट गये हो और जो शुद्ध रुद्राक्ष जैसे न हों, उन्हें धारण न करें।
3-धारण करने से पहले परीक्षण कर लें कि रुद्राक्ष असली है या नकली।नकली रुद्राक्ष पानी में तैरने लगेगा और असली रुद्राक्ष पानी में डूब जाएगा।
4-जो रुद्राक्ष गोल, चिकना, मोटा, कांटेदार हो, उसे ही खरीदना चाहिए।
5-एकमुखी रुद्राक्ष को किसी पीतल के बर्तन में रख दें। उसके ऊपर से 108 बिल्वपत्र लेकर चंदन से ओम नमः शिवाय मंत्र लिखकर सबसे नीचे रुद्राक्ष रखकर रात्रि में रख दें। प्रातः रुद्राक्ष बिल्वपत्र के ऊपर विराजित होगा तो वह शुद्ध रुद्राक्ष होगा।
6-एकमुखी रुद्राक्ष को ध्यानपूर्वक देखने पर त्रिशूल या नेत्र का निशान कहीं न कहीं अवश्य ही दिखाई देता है।
7-रुद्राक्ष के दानों को तेज धूप में छः घंटे तक रखने से अगर रुद्राक्ष चट कें (टूटे नहीं) तो असली माने जाते हैं।
8-रुद्राक्ष धारण करने पर मद्य, मांस, लहसुन, प्याज, सहजन, लिसोडा और विड्वराह (ग्राम्यसूयकर) इन पदार्थो का परित्याग करना चाहिए।
9-जप आदि कार्यो में छोटा रुद्राक्ष ही विशेष फलदायक होता है और बड़ा रुद्राक्ष रोगों पर विशेष फलदायी माना जाता है ।
10-रुद्राक्ष शिवलिंग से अथवा शिव प्रतिमा से स्पर्श कराकर धारण करना चाहिए।
11-रुद्राक्ष धारण करने के उपरांत सुबह-सायं भगवान शंकर का पूजन और ओम नमः शिवाय मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए।
रुद्राक्ष माला को धारण करने के नियम
1 जिस रुद्राक्ष माला से जाप किया जाता है
उसे धारण नहीं करना चाहिए। उसी प्रकार जिस माला को धारण किया जाता है उससे जाप नहीं करना
चाहिए।
2 किसी
अन्य के उपयोग में आया रुद्राक्ष अथवा रुद्राक्ष माला को उपयोग नहीं करना चाहिए।
3 रुद्राक्ष
की प्राण-प्रतिष्ठा करवाने के पश्चात उसे शुभ मुहूर्त में ही धारण करें।
4 रुद्राक्ष
धारण करने वाले जातक को मांस, मदिरा,
लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना
चाहिए।
5 रुद्राक्ष
को अंगूठी में जड़वाकर धारण नहीं करना चाहिए।
6 स्त्रियों
को मासिक धर्म के समय रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए।
7 रुद्राक्ष
धारण कर रात को शयन नहीं करना चाहिए।
जो
व्यक्ति पवित्र और शुद्ध मन से भगवान शंकर की आराधना करके रुद्राक्ष धारण
करता है, उसका सभी कष्ट दूर हो
जाता है।
यहां तक मानना है कि इसके दर्शन मात्र से ही पापों का क्षय हो जाता है। जिस घर में रुद्राक्ष
की पूजा की जाती है, वहां
लक्ष्मी जी का वास रहता है। रुद्राक्ष भगवान शंकर की एक अमूल्य
और अद्भुद देन है। यह शंकर जी की अतीव प्रिय वस्तु है। इसके स्पर्श तथा
इसके द्वारा जप करने से ही समस्त पाप से निवृत्त हो जाते है और लौकिक-परलौकिक
एवं भौतिक सुख की प्राप्ति होती है।
रुद्राक्ष शाबर मंत्र
एक गया पूर्व, एक गया दक्षिण, एक गया पश्चिम, एक गया उत्तर, एक गया आकाश, एक गया पाताल, उसमे लाग्या एक मुख रुद्राक्ष, श्री रुद्र पर चढ़ाइये | श्री ओंकार आदिनाथ जी को | दो मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये चन्द्र सूर्य को | तीन मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये तीन लोकों को | चार मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये चार वेदों को | पांच मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये पांच पांडवों को | छः मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये षट दर्शन को | सात मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये सप्त समुन्द्रों को | अष्ट मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये अष्ट कुली नागों को | नवमुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये नवनाथों को | दशमुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये दश अवतारों को | ग्यारह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये ग्यारह रुद्र को | बारह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये (सूर्य) बारह पंथ को | तेरह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये तैंतीस कोटि देवताओं को | चौदह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये चौदह भुवन (चौदह रत्नों) को | पंद्रह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये पंद्रह तिथियों को | सोलह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये सोलह श्रृंगार को | सत्रह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये श्री सीता माता को | अठारह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये अठारह भार वनस्पतियों को | उन्नीस मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये अलष पुरुष को | बीस मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये विष्णु भगवान् को | इक्कीस मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये इक्कीस ब्रह्माण्ड शिव को | निरमुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये निराकार को | इतना रुद्राक्ष मंत्र सम्पूर्ण भया | श्रीनाथ जी के चरण कमल में आदेश | आदेश |
vedik mantra
एकमुखी
रुद्राक्ष मंत्र | Ek Mukhi Rudraksha
एक मुखी शिव के सामान
माना गया है. यह साक्षात भगवान शिव का रुप है इस एक मुखी रुद्राक्ष के मंत्र जाप करने से सर्व कामनाएं पूर्ण होती
हैं. एक मुखी रुद्राक्ष का मंत्र है-
ऊँ ह्रीं नम:
दो
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Do Mukhi
Rudraksha Mantra
द्विमुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए इस मंत्र की पांच माला प्रतिदिन करने से घोर
पापों का नाश होता है. अर्धनारीश्वर स्वरुप इस रुद्राक्ष के मंत्र
जाप द्वारा स्वर्ग प्राप्ति होती है.
त्रिमुखी
रुद्राक्ष मंत्र | Teen Mukhi Rudraksha
तीन मुखी रुद्राक्ष के
लिए “
ऊँ क्लीं नम:” मंत्र का
जाप करें. यह त्रिमुखी रुद्राक्ष अग्नि का स्वरुप कहा जाता है. यह गार्हपत्य, आहवनीय तथा
दक्षिणाग्नि का रुप है, इस मंत्र का जाप करने
से सफलता प्राप्त होती है.
चार
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Chaar
Mukhi Rudraksha
चतुर्मुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ ह्रीं नम:” मंत्र का जाप करें. इस मंत्र जाप द्वारा ज्ञान की प्राप्ति
होती है तथा संतान की कामना पूर्ण होती है,
यह चार मुखी रुद्राक्ष भगवान
ब्रह्मा का रुप रहा है यह रुद्राक्ष श्रेष्ठफल प्रदान करता है.
पांच
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Paanch
Mukhi Rudraksha Mantra
पंच मुखी रुद्राक्ष मंत्र “ऊँ ह्रीं नम:” का जाप करने से पंचदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह
कालाग्निरुद्र का स्वरूप कहा जाता है. इस मंत्र का नियमित जाप करने से
मान सम्मान, धन प्राप्ति
होती है. इसके कम से कम तीन दाने अवश्य धारण करने चाहिए.
छ:
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Chheh
Mukhi Rudraksha Mantra
षष्ठ मुखी रुद्राक्ष के
लिए “ऊँ ह्रीं हुं नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए. भगवान कार्तिकेय के रुप कहा
जाने वाला यह रुद्राक्ष आरोग्य प्रदान करता है
नियमित रुप से इसके मंत्र का जाप करने
से विद्या, ज्ञान की प्राप्ति होती
है.
सात
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Saat
Mukhi Rudraksha Mantra
सप्त मुखी रुद्राक्ष के
लिए “ऊँ हुं नम:” मंत्र का जाप करें. इस मंत्र के जाप द्वारा धन संपत्ति की
प्राप्ति होती है सात मुखी रुद्राक्ष के मंत्र से भगवान सूर्य एवं
सप्तऋषि प्रसन्न होते हैं. यह
मंत्र व्यक्ति को यश, कीर्ति एवं सूर्य के समान तेज प्रदान करता है.
आठ
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Aath
Mukhi Rudraksha Mantra
अष्टमुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ हुं नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र के नियमित उच्चारण
द्वारा भैरव जी की कृपा प्राप्त
होती है. इस मंत्र जाप द्वारा दीर्घायु का वरदान मिलता है तथा व्यापार में सफलता प्राप्त होती है.
नौ
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Nau
Mukhi Rudraksha Mantra
नव मुखी रुद्राक्ष मंत्र “ऊँ ह्रीं हुं नम:” के उच्चारण द्वारा नव शक्तियों का आशिर्वाद प्राप्त
होता है. इसे रुद्राक्ष को भुजा में धारण करके इस मंत्र का जाप करें यह
आपका रोगों से बचाव करेगा
तथा मृत्यु का भर समाप्त होगा.
दस
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Dus
Mukhi Rudraksha Mantra
दशम मुखी रुद्राक्ष मंत्र “ऊँ ह्रीं नम:” का जाप अशुभ ग्रहों को शांत करता है. भगवान विष्णु का
प्रतीक यह रुद्राक्ष बीज मंत्र
द्वारा भूत प्रेत बाधा, जादूटोनों से मुक्त
करता है तथा व्यक्ति को सुरक्षा का अहसास कराता है.
ग्यारह
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Gyarah
Mukhi Rudraksha Mantra
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के
लिए “ऊँ ह्रीं हुं नम:” बीज मंत्र का जाप करें.
एकादशमुखी रुद्राक्ष के इस मंत्र के
नियमित जाप द्वारा भाग्य वृद्धि होती है. व्यक्ति को समस्त
सुखों की प्राप्ति होती है.
बारह
मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Baraha
Mukhi Rudraksha Mantra
द्वादश मुखी रुद्राक्ष के
बीज मंत्र “ऊं क्रौं क्षौं रौं नम:” का जाप व्यक्ति को अश्वमेधादि का फल प्रदान करता है. इस मंत्र के उच्चारण द्वारा
असाध्य रोगों से छुटकारा प्राप्त होता है.
lord ganesha ka shabar mantra
ॐ गणपति यहाँ पठाऊ तहां जावो
दस कोस आगे जा
ढाई कोस पीछे जा
दस कोस सज्जे दस कोस खब्बे
मैया गुफ्फा की आज्ञा मान रिद्धि सिद्धि देवी आन
अगर सगर जो न आवे तो माता पारवती की लाज !
ॐ क्राम फट स्वाहा !
|| विधि ||
हर रोज
गुरु पूजन और गणेश पूजन करे ! इस मन्त्र की हररोज 5 माला जाप करे और गणेश जी की मूर्ती के दोनों
तरफ एक एक गोमती चक्र रखे ! उन्हें देवी
रिद्धि और सिद्धि मानकर उनका भी पूजन करे ! मूर्ती अगर कुम्हार के घर की मिटटी से बनाये तो ज्यादा अच्छा है नहीं तो बाज़ार से भी लाकर रख सकते है
या पारे के गणेश जी भी रख सकते है !जप रात को करे 21 दिन की क्रिया है ! अंतिम दिन पांच लड़ू और मीठा सिंधूर गणेश जी के मंदिर में चढ़ाये और देवी रिद्धि सिद्धि के लिए श्रृंगार का सामान मंदिर में चढ़ाये !
सभी रोगों की दवा
॥ मंत्र ॥
वन में बैठी वानरी।
अंजनी जाओ हनुमान।
बाल डमरू बयाही बिलाई।
आँख की पीड़ा।
मस्तक की पीड़ा।
चौरासी बाई।
बलि बलि भसम हो जाय।
पके न फूटे।
पीड़ा करे तो गुरु गोरखनाथ यति रक्षा करे।
गुरु की शक्ति।
मेरी भक्ति।
फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा।
विधि: ५१ माला शनिवार रात को जप कर मंत्र सिद्ध कर लो।
फिर जब भी आवश्यकता पड़े तो जस्ट १०८ बार जप कर मोरपंख से रोगी
को झाड़ा लग दो। चाहे रोग कुछ भी को इस मंत्र कि शक्ति से हैट जाएगा
graho ke shabar mantra
ll ओम गुरूजी मंगलवार मन कर बन्दा,जन्ममरण का कट जावे फन्दा।जन्म मरण का भागे कार।तो गुरू पावूं मंगलवार। मंगलवार भारद्वाज गोत्र,रक्त वर्ण दस हजार जाप अवन्तिदेश।दक्षिण स्थान त्रिकोण मंडल तीन अंगुल,वृश्चिक
मेष राशि के गुरू को नमस्कार।सत फिरे तो वाचा फिरे।पान फूल वासना सिंहासन धरै।तो इतरो काम मंगलवार जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहा ll
सूर्य शाबर मंत्र:-
ll ओम गुरूजी दीत दीत महादीत।दूत सिमरू दसो द्वार।घट मे राखे घेघट पार
तो गुरू पावूं दीतवार।दीतवार कश्यप
गोत्र,रक्त वर्ण जाप सात हजार कलिंग देश मध्य स्थान वर्तुलाकार मंडल १२ अंगुल सिंह राशि के गुरू को नमस्कार।सत फिरे
तो वाचा फिरे,पीन फूल वासना सिंहासन
धरे, तो इतरो काम दीतवार जी महाराज
करेओम फट् स्वाहा
शाबर शनि मंत्र:-
llओम गुरूजी थावर वार।थावर आसन थरहरो। पॉंच तत्व की विद्या करो पॉंच तत्व का साधो करो विचार।तो गुरू पावूं थावर
वार शनिवार कश्यप गोत्र कृष्ण वर्ण तेईस
हजार जाप सोरठ देश पश्चिम स्थान धनुषाकार मंडल,तीन अंगुल़,मकर कुम्भ राशि के गुरू को नमस्कार।सत फिरे तो वाचा फिरे,पान फूल वासना सिंहासन धरे।तो इतरो काम थावर जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहा ll
बुध मंत्र:-
ll ओम गुरूजीबुधवार बुध लेकर जूंझे।पॉंच पचीस ले घट में चढ़े। निसाण घुरावे।आवागमन मेंकदे नआवे।।बुध करो शुद्ध,घर सगत पाणी भरे,। बुधवार अत्रि गोत्र,पीत वरण चार हजार जाप मगहद देश,ईशान कोण स्थान।बाणाकारमंडल ४
अंगुल।कन्या मिथुन राशि के गुरूको नमस्कार।।सत फिरे तो वाचाफिरे।। पान फूल वासना सिंहासन धरै।तो इतरो काम बुधवार जी महाराज करे।। ओम फट् स्वाहा ll
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें